गोरखपुर हिंसा प्रकरण: मासूम आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रही, महिला आयोग ने एसएसपी से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट — गिरफ्तारी अब तक नहीं
Feb 07, 2026 | by Janjeevan
गोरखपुर जनपद के सिकरीगंज थाना क्षेत्र से घरेलू हिंसा और कथित दहेज उत्पीड़न का एक अत्यंत संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने क्षेत्र में गहरी चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। पीड़िता नेहा तिवारी के परिजनों का आरोप है कि वर्ष 2020 में विवाह के बाद से ही दहेज में लगभग एक लाख रुपये की मांग को लेकर उनके साथ लगातार मारपीट, मानसिक उत्पीड़न और प्रताड़ना की जा रही थी। परिवार का कहना है कि दो बेटियों के जन्म के बाद यह अत्याचार और बढ़ गया, जिनमें छोटी बेटी की उम्र लगभग एक वर्ष बताई जा रही है।
परिजनों के अनुसार, इसी क्रम में आरोपी चंदन तिवारी द्वारा मासूम बच्ची को जोर से पटक देने से उसके सिर में गंभीर चोट आई, जिसके बाद उसकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई। बच्ची को इलाज के लिए एम्स, गोरखपुर में भर्ती कराया गया, जहां वह वर्तमान में आईसीयू में जीवन के लिए संघर्ष कर रही है। परिवार इस स्थिति से गहरे मानसिक आघात, भय और असुरक्षा में है।
बताया गया है कि 28 जनवरी 2026 को जब नेहा तिवारी के मायके पक्ष के लोग स्थिति जानने पहुंचे, तब उन पर भी कथित रूप से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें कई लोगों को चोटें आईं। इस पूरे घटनाक्रम के संबंध में 29 जनवरी 2026 को थाना सिकरीगंज में चंदन तिवारी तथा उनके परिजनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के कई दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी या प्रभावी पुलिस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिवार ने निष्पक्ष जांच, शीघ्र गिरफ्तारी और सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की है।
इस बीच मामले ने नया मोड़ तब लिया जब पीड़ित पक्ष ने राष्ट्रीय महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग की सदस्य *ममता कुमारी* ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गोरखपुर को प्रकरण में विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं तथा निर्धारित अवधि के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन (Action Taken Report) आयोग को उपलब्ध कराने को कहा है।
इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अभी तक ठोस कार्रवाई न होने को लेकर परिवार ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें न्याय का स्पष्ट मार्ग दिखाई नहीं दे रहा है और वे प्रशासन से मानवीय संवेदना के साथ त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा कर रहे हैं।
यह मामला न केवल घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न जैसे गंभीर सामाजिक प्रश्नों को सामने लाता है, बल्कि कानून-व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। क्षेत्र के लोगों के बीच घटना को लेकर संवेदना और आक्रोश दोनों दिखाई दे रहे हैं, जबकि अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं

