• 04:09 PM- Apr 11, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता कांड पर सीबीआई से 22 अगस्त तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी, डॉक्टर्स से काम पर लौटने का अनुरोध


सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता कांड पर सीबीआई से 22 अगस्त तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी, डॉक्टर्स से काम पर लौटने का अनुरोध
Image Source By : Janjeevan

नई दिल्ली, 20 अगस्त । सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता दुष्कर्म और हत्या मामले में सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह 22 अगस्त तक स्थिति रिपोर्ट पेश करे। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल कोलकाता में हत्या का नहीं, बल्कि पूरे देश में डॉक्टरों की सुरक्षा का भी है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि एक नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमियों के डॉक्टर शामिल होंगे। यह टास्क फोर्स पूरे भारत में लागू किए जाने वाले सुरक्षा उपायों का सुझाव देगा ताकि डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और युवा डॉक्टर सुरक्षित माहौल में काम कर सकें। डॉक्टरों से अनुरोध किया गया है कि वे काम पर लौटें, और अगर किसी मरीज की जान जाती है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए हम यहां हैं कि उनकी सुरक्षा की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मामले में मीडिया में पीड़िता का नाम और मृतक की तस्वीरें प्रकाशित होने पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि यौन पीड़िताओं के नाम और तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह एक गंभीर घटना है और गरिमा का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस के पहुंचने से पहले तस्वीरें और वीडियो ले ली गई थीं।

चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि प्रोटोकॉल केवल कागज पर नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरे देश में लागू होना चाहिए। कोलकाता में पीड़िता का नाम और तस्वीर मीडिया में प्रकाशित हुईं। सिब्बल ने कहा कि जांच से पता चला कि यह हत्या का मामला है। चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या एफआईआर में हत्या का जिक्र है और कहा कि अपराध की सूचना सुबह मिली, जबकि अस्पताल के प्रिंसिपल ने इसे आत्महत्या बताया। पीड़िता के माता-पिता को शव नहीं देखने दिया गया। सिब्बल ने इसे गलत बताया और कहा कि एफआईआर देर रात तक दर्ज नहीं की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि कोलकाता पुलिस क्या कर रही थी, और बताया कि पीड़िता का शव शाम को माता-पिता को अंतिम संस्कार के लिए मिला। इसके बाद डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया और कुछ लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की। उन्होंने सवाल किया कि कोलकाता पुलिस ने क्या किया और अस्पताल के अंदर अपराध हुआ है। पुलिस को क्राइम सीन की सुरक्षा करनी चाहिए। सिब्बल ने बताया कि आरोपित सिविक वालंटियर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल के प्रिंसिपल के व्यवहार पर आपत्ति जताई और पूछा कि उन्हें दूसरे कॉलेज में कैसे तुरंत नियुक्त किया गया। सीबीआई को इस पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया। चीफ जस्टिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग न करने की बात की और कहा कि मेडिकल प्रोफेशन में संस्थागत सुरक्षा का अभाव है। देर रात तक ड्यूटी करने के बावजूद डॉक्टरों को आराम की व्यवस्था नहीं है, 36 घंटे तक काम करने के बावजूद उन्हें आराम करने का कमरा नहीं है। सफाई की बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। डॉक्टरों के लिए परिवहन की व्यवस्था और सीसीटीवी की कार्यशीलता की कमी है।

गौरतलब है कि नौ अगस्त को कोलकाता के आरजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में पीजी ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला था। 10 अगस्त को एक सिविल वालंटियर को गिरफ्तार किया गया। इस घटना के बाद देशभर में डॉक्टरों ने आंदोलन शुरू किया। 13 अगस्त को कोलकाता हाई कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने 14 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान आरजी कर अस्पताल में तोड़फोड़ के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है।