खनिज कंपनियों और केंद्र को 'सुप्रीम' झटका, नौ जजों की बेंच ने कहा- खनिज संपदा पर टैक्स पहली अप्रैल, 2005 से लागू होगा
Aug 14, 2024 | by Janjeevan
नई दिल्ली, 14 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान बेंच ने केंद्र और खनिज कंपनियों को एक बड़ा झटका दिया है। बेंच ने निर्णय दिया है कि खनिज संपदा पर टैक्स 1 अप्रैल, 2005 से लागू होगा। साथ ही, इस निर्णय में कहा गया है कि 1 अप्रैल, 2005 से किसी भी प्रकार का ब्याज या जुर्माना नहीं लगेगा। राज्य सरकारें 12 साल की अवधि में टैक्स वसूल सकती हैं। यह आदेश चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को इस मामले पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने विरोध किया कि राज्य सरकारें खनिज संपदा पर लगाए गए टैक्स का रिफंड मांग सकती हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि टैक्स का रिफंड मांगने से बहुआयामी प्रभाव पड़ेंगे। उन्होंने मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों की दलील का हवाला दिया कि यह निर्णय केवल आगे से लागू किया जाए। दूसरी ओर, विपक्ष शासित राज्यों ने इस आदेश को पूर्ववर्ती प्रभाव से लागू करने की मांग की ताकि वे केंद्र से रिफंड प्राप्त कर सकें। खनन से जुड़ी कंपनियों और फर्मों ने केंद्र के रुख का समर्थन किया।
25 जुलाई को, नौ सदस्यीय संविधान बेंच ने 8:1 के बहुमत से निर्णय सुनाया कि राज्य सरकारों को खनिज संपदा पर टैक्स लगाने का अधिकार है, और यह अधिकार केंद्रीय कानून माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इस बेंच ने यह फैसला दिया, जबकि जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इसके विपरीत निर्णय दिया।
यह मामला इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड और तमिलनाडु सरकार के बीच विवाद से शुरू हुआ था। इंडिया सीमेंट्स ने खनन लीज लेने के बाद तमिलनाडु सरकार को रॉयल्टी का भुगतान किया था, लेकिन राज्य सरकार ने रॉयल्टी के अलावा एक और सेस लगा दिया। इंडिया सीमेंट्स ने इस पर मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उनका कहना था कि रॉयल्टी पर सेस लगाना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। तमिलनाडु सरकार ने इसका तर्क दिया कि सेस भू-राजस्व के तहत आता है और इसे राज्य सरकार लागू कर सकती है।
1989 में, सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने इंडिया सीमेंट्स के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि खनिज संपदा वाली जमीन पर टैक्स लगाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, जबकि राज्य सरकार रॉयल्टी लगा सकती है लेकिन टैक्स नहीं। नौ सदस्यीय बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस ह्रषिकेश राय, जस्टिस एएस ओका, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस उज्जल भुईंया, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एजी मसीह शामिल थे।

