हिन्दू संस्कृति में पर्यावरण सरंक्षण का विशेष महत्व रेखांकित करती श्रावणी अमावस
Aug 03, 2024 | by Janjeevan
भोपाल, 3 अगस्त श्रावण मास हमारी संस्कृति और पूजा-अर्चना में विशेष स्थान रखता है, जिसमें कई महत्वपूर्ण तीज-त्योहार आते हैं। इनमें से एक प्रमुख पर्व है हरियाली अमावस।
हरियाली अमावस श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष, अंग्रेंजी कैलेंडर के अनुसार 4 अगस्त को श्रावणी अमावस आएगी। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। यह तिथि सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी परंपराओं की भी पहचान है। भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसी संदर्भ में इस तिथि का भी विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन वृक्षारोपण कर प्रकृति की रक्षा का कार्य किया जाता है।
पूजा के बाद शुभ मुहूर्त में वृक्षारोपण किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन आम, आंवला, पीपल, वटवृक्ष और नीम के पौधों को लगाने का विशेष महत्व है।
हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व पुराणों और शास्त्रों में विस्तृत रूप से वर्णित है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी पाप समाप्त होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। नारद पुराण के अनुसार, श्रावण मास की अमावस्या को पितृ श्राद्ध, दान, हवन और देव पूजा जैसे शुभ कार्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, इस अमावस्या पर व्रत करने से व्यक्ति को कई गुना फल प्राप्त होता है और मोक्ष के द्वार खुलते हैं। इस दिन पितृ तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
कई शहरों और गांवों में इस दिन हरियाली अमावस्या के मेलों का आयोजन किया जाता है, जिसमें गुड़ और गेहूं की धानी का प्रसाद वितरित किया जाता है।
किसान इस दिन गेहूं, ज्वार, चना और मक्का की सांकेतिक बुआई करते हैं। नदियों के किनारे स्नान करने की भी परंपरा है। हरियाली अमावस्या पर दान पुण्य का विशेष महत्व है। अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यह पर्व लोक परंपराओं और मान्यताओं को भी सुदृढ़ करता है।

