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सूरत के हीरा उद्योग में मंदी का असर, वेतन कटौती के साथ कर्मचारी छुट्टी पर भेजे गए


सूरत के हीरा उद्योग में मंदी का असर, वेतन कटौती के साथ कर्मचारी छुट्टी पर भेजे गए
Image Source By : Janjeevan

वैश्विक हीरा बाजार में गिरावट: युद्ध और लैबग्रोन डायमंड्स के कारण सूरत का उद्योग संकट में

सूरत, 07 अगस्त सूरत का हीरा उद्योग इस समय गंभीर मंदी की चपेट में है। अगर हालात नहीं सुधरे तो यह संकट वर्ष 2008 की भांति गंभीर हो सकता है, जब बड़ी संख्या में हीरा कारीगरों ने आत्महत्या की थी। इस संकट का कारण वैश्विक संघर्ष, बाजार में मांग में कमी, और लैबग्रोन डायमंड्स का अधिक उत्पादन है। वर्तमान में सूरत के हीरा उद्योग से जुड़े व्यवसायी वेतन कटौती, मिनी वैकेशन जैसी व्यवस्थाओं के जरिए इस कठिन दौर को झेल रहे हैं।

हीरा उद्योग में काम करने वाले कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्हें या तो मिनी वैकेशन पर भेजा जा रहा है या फिर कम वेतन पर काम पर रखा जा रहा है। कुछ प्रमुख हीरा उद्यमियों ने अपने कारखानों को आगामी 10 दिनों के लिए बंद करने का निर्णय लिया है। सूरत में किरण जेम्स हीरा उद्योग की सबसे बड़ी यूनिट मानी जाती है और इसे दुनिया की सबसे बड़ी नेचुरल डायमंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी बताया जाता है। किरण जेम्स के अध्यक्ष वल्लभभाई लखानी के अनुसार, उन्होंने अपने 50,000 कर्मचारियों के लिए 10 दिन की छुट्टी घोषित की है। इन कर्मचारियों के वेतन में थोड़ी कटौती की जाएगी, लेकिन पूरी अवधि का वेतन दिया जाएगा।

सूरत में 3,200 डायमंड यूनिट्स हैं, जिनमें 700 बड़ी और 2,500 छोटी इकाइयाँ शामिल हैं। इन इकाइयों में लगभग 10 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 8 लाख हीरा कारीगर हैं और बाकी 2 लाख प्रशासनिक कार्यों से जुड़े हैं। सूरत में विदेशी देशों से रफ डायमंड आयात किया जाता है, जिसे कटिंग और पॉलिशिंग के बाद निर्यात किया जाता है। तैयार हीरों का 95 फीसदी निर्यात किया जाता है, और विश्व के तैयार हीरों में से 9 में से 8 हीरा सूरत में तैयार होता है। सूरत से निर्यात होने वाले हीरों का 60 फीसदी अमेरिका भेजा जाता है.

सूरत के हीरा उद्योग में मंदी का प्रभाव पिछले दो साल से देखा जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से उद्योग प्रभावित होने लगा था, और इजराइल-हामास संघर्ष ने स्थिति को और भी बिगाड़ दिया। लक्जरी आइटम के रूप में हीरा की वैश्विक मांग लगातार घट रही है। इसके अलावा, लैब में निर्मित हीरों की अधिकता ने प्राकृतिक हीरों की मांग को भी प्रभावित किया है।

डायमंड वर्कर यूनियन ने हाल ही में कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर उद्योग की गंभीर स्थिति की जानकारी दी। यूनियन के अनुसार, पिछले 18 महीनों में 60 हीरा कारीगरों ने आत्महत्या की है, जो कि स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश खूंड ने बताया कि विदेशी देशों से आए ऑर्डर रद्द हो गए हैं और उनके कमिटमेंट खारिज कर दिए गए हैं। इस कारण वैश्विक बाजार में हीरा की मांग में कमी देखी जा रही है। वर्तमान स्थिति की अनुकूलता के कारण सूरत की कुछ हीरा इकाइयों ने यूनिट बंद कर दिए हैं, और पाइपलाइन में तैयार हीरा बड़ी मात्रा में पड़ा हुआ है, जिससे नई मांग नहीं बन पा रही है।