विरासत के आगे फीका पड़ा डीजे का क्रेज: वडोदरा में पुलिस और जनता ने मिलकर बचाई शहर की 'धरोहर'
Feb 18, 2026 | by Janjeevan
गुजरात लेटेस्ट हिंदी न्यूज,विरासत के आगे फीका पड़ा डीजे का क्रेज: वडोदरा में पुलिस और जनता ने मिलकर बचाई शहर की 'धरोहर' - vadodara police dj ban to protect city heritage cp ips narasimha komar thanks peoples know all - Ahmedabad News - Navbharat Times
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विरासत के आगे फीका पड़ा डीजे का क्रेज: वडोदरा में पुलिस और जनता ने मिलकर बचाई शहर की 'धरोहर'
Vadodara DJ Ban: गुजरात के वडोदरा में शहर पुलिस ने सेंसटिव पुलिसिंग की नई मिसाल पेश की है। पुलिस ने शहर के पुराने हिस्से में डीजे की पाबंदी के चुनौतीपूर्ण नियम को सफलतापूर्वक लागू किया है। पिछले 10 महीन से पुलिस की तरफ से निरंतर कोशिशें जारी थीं। पीएम मोदी के विरासत भी, विकास भी के मंत्र के अनुसार पुलिस ने अपनी पहल को लागू किया। जिसे लोगों का समर्थन मिला।
वडोदरा शहर पुलिस ने सॉफ्ट एप्रोच से लागू किया डीजे पाबंदी का आदेश।
देशभर में डीजी के बढ़ते क्रेज के बीच गुजरात के वडोदरा में बड़ी मिसाल पेश की है। पिछले साल मई में जब डीजे की आवाज और वाइब्रेशन से शहर की पुरानी इमारतों को क्षति होने का मुद्दा उठा तो करीब साल भर पहले वडोदरा महानगरपालिका (VMC) ने चार दरवाजों में आने वाले शहर के पुराने हिस्से में 'नो डीजे जोन' घोषित कर दिया था, लेकिन इसे अमल में लाने की बड़ी जिम्मेदारी शहर पुलिस के कंधों पर आई। ऐसे में 1996 बैच के आईपीएस और डीजीपी रैंक अधिकारी नरसिम्हा कोमार ने कम्युनिटी मोबाइलाजेशन और लोगों सेंसटाइज करना शुरू किया। ऐसा करके उन्होंने न सिर्फ इस पांबदी को लागू किया बल्कि एक नई लकीर खींच दी है। वडोदरा शहर पुलिस की इस पहल ने शहर के हेरीटेज लवर्स को खुश कर दिया है।
दरअसल, गुजरात में अहमदाबाद और वडोदरा में काफी हेरीटेज स्ट्रक्चर हैं। अहमदाबाद को यूनेस्को ने साल 2017 में वर्ल्ड हेरीटेज सिटी घोषित कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 'विरासत के साथ विकास' के अनकूल वडोदरा शहर पुलिस ने लोगों को पुराने दरवाजों और बिल्डिंग की अहमियत समझाई। जब पुलिस ने कहा कि ये शहर आपका। ये विरासत भी आपकी है, तो लोगों को सहयोग मिला। पुलिस ने डंडे की बजाए सॉफ्ट एप्रोच से काम लिया तो ओल्ड सिटी में धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजकों ने भी इसकी अहमियत समझी। पुलिस ने चुनौतीपूर्ण इस पाबंदी को लागू कर दिया।
वडोदरा की देश और दुनिया में पहचान कल्चरल सिटी के तौर पर है। अतीत में गायकवाड़ रियासत का केंद्र रहे वडोदरा (तब बड़ौदा) में काफी हेरीटेज इमारते हैं। इसमें उस वक्त के चार दरवाजें शामिल हैं। इनमें मांडवी गेट (केंद्र में), लेहरीपुरा गेट (पश्चिम), चंपानेर गेट (उत्तर), और पानी गेट (पूर्व)। इसके बाद ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस है। डीजे पर रोक सिर्फ पुराने शहर में है। नए शहर में डीजे बजाने की नियमों के साथ अनुमति है। वडोदरा पिछले एक दशक में गरबा कैपिटल के तौर पर भी उभरा है। यहां पर बड़े-बड़े गरबा का आयोजन होता है।
वडोदरा शहर पुलिस ने डीजे पाबंदी को लागू करने के लिए सभी धर्म के लोगों के साथ बैठकें की। मुस्लिम धर्म के कार्यक्रमों में पुलिस ने डीजे की अनुमति नहीं दी।
ने कहा कि ऐसा इसलिए हो सका क्योंकि लोगों ने विरासत के महत्व को समझा। पुलिस की तरफ से सिर्फ उन्हें डीजे पर रोक के पीछे के कारणों के बारे में अवगत कराया गया। कोमार कहते हैं इसके लिए धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करने वाले सभी लोग बधाई के पात्र हैं।
शहर पुलिस की पहल के चलते ही महाशिवरात्रि पर 'शिव की सवारी' में डीजे नहीं बजा, बल्कि परंपरागत बैंड की धुनों ने समां बांध दिया। हर हर महादेव और शिव, शंभु की आराधना के साथ यह यात्रा पूरी हुई। इस आयोजन में खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए थे। उन्होंने यात्रा के समापन स्थल सुर सागर पर महाआरती भी की थी। हेरीटेज ट्रस्ट के अध्यक्ष समीर खेड़ा कहते हैं कि वडोदरा एक संस्कारी नगरी है। यह आनंद की बात है।
अचलेन्द्र कुमार कटियार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हैं। 2008 में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डीएलए अखबार से की थी। वे 17 साल के सफर में आई नेक्स्ट, आज समाज और दैनिक हिंदुस्तान में काम कर चुके हैं। वह गुजरात, महाराष्ट्र समेत पश्चिम के राज्यों के हर घटनाक्रम पर नजर रखते हैं। उन्हें राजनीति की अच्छी समझ है। दक्षिण और नॉर्थ ईस्ट के राज्यों के हलचल पर नजर रखते हैं।
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