मेरठ, 14 अगस्त। 1857 की क्रांति के महत्वपूर्ण स्थल विक्टोरिया पार्क को आज भी याद किया जाता है। अंग्रेजों के शासनकाल में इस स्थान पर एक जेल थी, जिसमें विद्रोह करने वाले भारतीय सैनिकों को बंद किया गया था। दस मई को इस जेल पर हमला करके भारतीय सैनिकों ने अपने साथियों को मुक्त किया और अंग्रेजों को मार गिराने के बाद दिल्ली की ओर बढ़े।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रमुख प्रो. केके शर्मा के अनुसार, 10 मई 1857 की क्रांति एक योजनाबद्ध स्वतंत्रता संग्राम था, जो नियत समय से पहले शुरू हुआ। मेरठ की क्रांतिधरा में आज भी इस संग्राम के कई स्थल मौजूद हैं। वर्तमान विक्टोरिया पार्क के स्थान पर अंग्रेजों के समय में एक जेल थी, जो अब भामाशाह क्रिकेट ग्राउंड, क्रिकेट एकेडमी, बैडमिंटन एकेडमी और प्रोफेसर्स क्वार्टर्स के रूप में बदल चुकी है। इसी जेल में अंग्रेजों ने चर्बी लगे कारतूसों का विरोध करने वाले 85 भारतीय सैनिकों को बंद किया था और उन्हें दस साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद, अन्य भारतीय सैनिकों ने विक्टोरिया पार्क जेल पर हमला किया और इन सैनिकों की बेड़ियां काटकर उन्हें आजाद किया। आजाद होते ही इन सैनिकों ने बंदूकें उठाईं और मेरठ में अंग्रेजों को मार गिराया।
मेरठ से विद्रोह के बाद, क्रांतिकारी दिल्ली की ओर बढ़े और लाल किले पर अपने परचम लहराए। मेरठ से उठी इस क्रांति की लहर ने पूरे देश में फैलकर भारतीयों को अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया।
विक्टोरिया पार्क में उन 85 क्रांतिकारियों के नाम अंकित हैं, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इन अमर वीर क्रांतिकारियों को नमन करने के लिए यहां आ चुके हैं।
इसके अलावा, मेरठ कैंट स्थित सिद्ध औघड़नाथ महादेव मंदिर, जिसे अंग्रेजों के समय में काली पलटन कहा जाता था, 1857 की क्रांति का गवाह है। भारतीय सैनिकों की गहरी आस्था के कारण इसे काली पलटन के नाम से जाना गया। क्रांति के समय में यहां गुप्त मंत्रणा होती थी। आज भी शिवरात्रि और महाशिवरात्रि के अवसर पर लाखों कांवड़िये इस मंदिर में जलाभिषेक करते हैं।

