नई दिल्ली, 10 अगस्त केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बैंकों से अपने मूल कार्यों पर वापस लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि बैंकों को अपनी जमा राशि बढ़ाने और ऋण देने के मूल काम पर ध्यान देना चाहिए। बैंकों का मुख्य उद्देश्य है डिपॉजिट लेना और लोगों को ऋण प्रदान करना।
वित्त मंत्री सीतारमण ने नई दिल्ली में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के केंद्रीय निदेशक मंडल के साथ पारंपरिक बैठक के बाद आयोजित एक साझा प्रेस कांफ्रेंस में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हम बैंकिंग विनियमन में संशोधन ला रहे हैं, जिसकी कई वजहें हैं। यह संशोधन लंबे समय से लंबित था और इसका इंतजार किया जा रहा था। इस बैठक में वित्त मंत्री के साथ केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी भी मौजूद थे।
सीतारमण ने सहकारी क्षेत्र के बैंकिंग में कुछ पुनर्गठन का भी उल्लेख किया और कहा कि ग्राहकों के लिए नामांकन जैसे कदम ग्राहक-अनुकूल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि उनके नामांकित व्यक्ति को भविष्य में अपनी संपत्ति पर दावा करने में कोई कठिनाई न हो।
सीतारमण ने बैंकों को अपने मूल कार्यों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता जताई और कहा कि उन्हें अपने डिपॉजिट को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वर्तमान में, बैंकों के डिपॉजिट धीमे चल रहे हैं। बैंकों को नए और आकर्षक निवेश विकल्प पेश करने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक लोग बैंकों में पैसे जमा करें। उन्होंने यह भी बताया कि शेयर बाजार में खुदरा निवेश बढ़ रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि लोग अधिक रिटर्न पाने के लिए विभिन्न विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। इसलिए, बैंकों को ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कुछ नई योजनाओं पर विचार करना चाहिए।

