रायपुर / कोरबा, 22 अगस्त । विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा से संबंधित छतकुंवर को अब एक शिक्षिका के रूप में मान्यता मिली है। छत्तीसगढ़ के संवेदनशील मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन कोरबा ने छतकुंवर को सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त किया है। विशेष पिछड़ी जनजाति से होने के बावजूद, छतकुंवर ने पोस्ट ग्रेजुएशन तक शिक्षा प्राप्त की है और कम्प्यूटर में डिप्लोमा भी किया है। उनकी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पीछे तत्कालीन कलेक्टर पी. दयानंद की प्रेरणा प्रमुख रही है।
पी. दयानंद, जो कोरबा में कलेक्टर के पद पर कार्यरत थे, ने एक बार आंछीमार गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गांव की सबसे शिक्षित पहाड़ी कोरवा छात्रा छतकुंवर से मुलाकात की और उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया। कलेक्टर ने छतकुंवर को सलाह दी कि आगे की पढ़ाई पूरी करके ही नौकरी प्राप्त की जा सकती है। आज, पोस्ट ग्रेजुएट छतकुंवर करतला ब्लॉक के शासकीय माध्यमिक विद्यालय नोनबिर्रा में सहायक शिक्षिका के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। वे कहती हैं कि उन्हें खुशी है कि तत्कालीन कलेक्टर पी. दयानंद ने उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। उनकी प्रेरणा का परिणाम है कि वे आज शिक्षिका बन गई हैं।
छतकुंवर का कहना है कि पहाड़ी कोरवा समाज अभी भी पिछड़ा हुआ है और समाज के कुछ ही लोग शिक्षा प्राप्त कर पाए हैं। उन्हें नौकरी मिलने से समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिली है और वे भी स्कूल जाने लगे हैं। छतकुंवर चाहती हैं कि उनके समाज के सभी लोग भी शिक्षा से जुड़ें और एक सामान्य जीवन जी सकें। उन्होंने शासन और प्रशासन को धन्यवाद दिया कि उन्होंने उन्हें और उनके समाज के बेरोजगारों को नौकरी के अवसर प्रदान किए, जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। छतकुंवर का कहना है कि उनके समाज में अभी भी कई घरों की स्थिति सामान्य नहीं है और गरीबी के कारण वे पीछे हैं। शिक्षा से जुड़ने के बाद, उन्हें विश्वास है कि जिला प्रशासन ने उन्हें नौकरी देकर उनके समाज को मुख्यधारा में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
छतकुंवर ने बताया कि उनके समाज में अधिकतर युवाओं ने ज्यादा पढ़ाई नहीं की, जिसके कारण उनका विवाह एक आठवीं पास सजातीय युवक से हुआ। अब, उनके पति की भी भृत्य के पद पर नौकरी लग गई है और परिवार खुशहाल है।

