• 04:19 PM- Apr 11, 2026

नाले में गिरकर मां और बच्चे की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को लगाई फटकार


नाले में गिरकर मां और बच्चे की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को लगाई फटकार
Image Source By : Janjeevan

नई दिल्ली, 6 अगस्त दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में एक खुले नाले में गिरकर मां और बच्चे की मौत के मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली नगर निगम से कहा कि अगर आप स्वयं कार्रवाई नहीं करेंगे, तो हम आपके अधिकारियों को निलंबित करना शुरू कर देंगे।

इस मामले में 22 वर्षीय तनुजा और उसका तीन साल का बेटा प्रियांश 31 जुलाई को गाजीपुर से गुजर रहे थे। भारी बारिश के कारण गाजीपुर नाले से पानी ओवरफ्लो हो रहा था, और महिला अपने बच्चे के साथ नाले में गिर गई, जिससे दोनों की मौत हो गई।

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली नगर निगम को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि आपके अधिकारी काम करने को गुनाह मानते हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि खुले नाले के आसपास तुरंत बैरिकेडिंग की जाए और वहां पड़े मलबे को हटाया जाए। हाई कोर्ट ने जांच अधिकारी से यह भी पूछा कि क्या घटनास्थल की ऑडियो वीडियोग्राफी की गई थी।

कोर्ट ने नाले की तस्वीरें देखने के बाद कहा कि यह अत्यंत परेशान करने वाली स्थिति है। चिकनगुनिया और डेंगू जैसी बीमारियों के बीच नालों की यह स्थिति चिंताजनक है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या नगर निगम वास्तव में काम कर रही है, क्योंकि वहां साल भर से मलबा पड़ा हुआ है। दिल्ली में इतने खुले नाले क्यों हैं, और यह किसके अधिकार क्षेत्र में आता है, इस पर भी सवाल उठाए गए। कोर्ट ने कहा कि मलबा इस तरह से नहीं रह सकता और सफाई की जिम्मेदारी सही ढंग से निभाई जानी चाहिए। मानसून के दौरान तेज बारिश की आशंका को देखते हुए इस प्रकार की घटना दोबारा हो सकती है।

सुनवाई के दौरान दिल्ली नगर निगम ने कहा कि जो नाला कवर था, वह डीडीए के अंतर्गत था, और खुले नालों को नगर निगम कवर करने का कार्य कर रही है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि ऐसा मत कहिए, क्योंकि वहां पर साल भर से मलबा पड़ा हुआ है और नियमित सफाई नहीं हो रही है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि लोकल कमिश्नर को वहां भेजा जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।

5 अगस्त को डीडीए ने कहा था कि जिस नाले की घटना हुई, वह डीडीए का नहीं बल्कि दिल्ली नगर निगम का है। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्होंने दिल्ली नगर निगम को पक्षकार बनाने के लिए अर्जी दाखिल कर दी है। याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और महिला और बच्चे की मौत की जांच शुरु करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि नाले के निर्माण करने वाले ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए और दिल्ली में नालों के निर्माण की विस्तृत ऑडिट कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। इसके अतिरिक्त, दिल्ली में बारिश जैसे हालात से निपटने के लिए योजना तैयार करने और सभी खुले नालों को ढकने का आदेश देने की मांग की गई है। साथ ही, आम जनता को साइन बोर्ड के माध्यम से जागरूक करने की भी अपील की गई है।