देश में सबसे पहले महाकाल के आंगन में मना रक्षाबंधन, भगवान को चढ़ाई गई वैदिक राखी
Aug 19, 2024 | by Janjeevan
**सावन के अंतिम सोमवार पर उज्जैन में रक्षाबंधन की धूम**
उज्जैन, 19 अगस्त । आज सावन के पांचवे और अंतिम सोमवार को रक्षाबंधन का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में रक्षाबंधन की पूजा बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ की गई। तड़के 2.30 बजे भगवान महाकाल को भस्म आरती के दौरान पंडे-पुजारियों के परिवार की ओर से राखी अर्पित की गई और सवा लाख लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया।
महाकालेश्वर मंदिर में सभी प्रमुख त्योहार पहले मनाए जाते हैं, और रक्षाबंधन भी इसी परंपरा के अनुसार मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महाकाल को वैदिक राखी चढ़ाई गई, जिसे सात दिन में तैयार किया गया था और इसमें तुलसी और बिल्व पत्रों का उपयोग किया गया। पुजारी परिवार की महिलाएं इस राखी को बनाती हैं।
इस साल सावन महीने की शुरुआत और समाप्ति दोनों ही सोमवार को हुई, जो विशेष संयोग था। रक्षाबंधन के अवसर पर मंदिर में दर्शन के लिए भक्त रविवार रात से ही कतार में लगने लगे थे। भस्म आरती के लिए रात 2.30 बजे पट खोल दिए गए और महाकाल का राजा स्वरूप में दिव्य श्रृंगार हुआ। हजारों श्रद्धालु इस दौरान मंदिर में पहुंचे और भगवान के दर्शन किए।
पंडित आशीष पुजारी ने बताया कि आज विशेष संयोग के कारण बाबा महाकाल का शुद्ध जल और पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसके बाद उनका श्रृंगार कर भस्म रमाई गई। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती के बाद भगवान को वैदिक राखी बांधी गई और रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान भगवान को मावा मिश्री के लड्डू का भोग भी अर्पित किया गया।
मंदिर में पिछले सात दिनों से वैदिक राखी का निर्माण किया जा रहा था, जिसमें तुलसी के पत्ते, लौंग, इलायची और काली मिर्च जैसी औषधियों का उपयोग किया गया था। रक्षाबंधन पर सवा लाख लड्डुओं का भोग भी अर्पित करने की परंपरा है, और आज के दिन यह भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं को वितरित किया गया।
शाम 4 बजे सावन माह की अंतिम सवारी निकाली जाएगी, जिसमें महाकाल होलकर मुखारविंद स्वरूप में प्रजा का हाल जानने निकलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी सवारी में शामिल होंगे और सीआरपीएफ बैंड भी साथ चलेगा।

