दिल्ली हाई कोर्ट ने गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों पर उठाए सवाल, केंद्रीय सशस्त्र बलों से जुड़ा है मामला
Nov 01, 2025 | by Janjeevan
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के दिशानिर्देशों की वैधता पर सवाल उठाया है। जिसमें दाहिने हाथ पर टैटू वाले उम्मीदवारों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल होने से रोक दिया गया है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, टैटू केवल बाएं अग्रबाहु पर ही स्वीकार्य हैं, जिसे सलामी न देने वाला अंग माना जाता है, और इसका आकार सीमित होना चाहिए। नियमों में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल धार्मिक प्रतीकों या नामों वाले टैटू ही स्वीकार्य हैं। सरकार का कहना है कि यह प्रतिबंध “सुव्यवस्था और अनुशासन” बनाए रखने और “पश्चिमी प्रभाव वाली त्वचा कला” के प्रसार को रोकने के लिए है।
जस्टिस सी. हरिशंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि दिशानिर्देश प्रथम दृष्टया सवाल खड़ा करते हैं। कोर्ट ने कहा कि हमने प्रतिवादियों की ओर से एसपीसी राजेंद्र साहू से पूछा है कि क्या ऐसा दिशानिर्देश कानूनन मान्य है। चूकि प्रथम दृष्टया हमारा मानना है कि याचिकाकर्ता को अयोग्य ठहराने का आधार सवाल खड़े कर सकता है, इसलिए कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा जाता है कि ऐसा नियम क्यों न जारी किया जाए। इस मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
हाई कोर्ट ने यह आदेश विपिन कुमार नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर पारित किया। याचिका में सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसे मोटर मैकेनिक वाहन के पद पर भर्ती से रोक दिया गया था, क्योंकि परीक्षकों ने उसके दाहिने हाथ पर एक टैटू पाया था।

