रांची, 22 अगस्त । झारखंड हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा शपथ पत्र दाखिल न किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने आईबी, यूआईडीएआई और बीएसएफ से अलग-अलग शपथ पत्र दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगने पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि झारखंड में आदिवासी जनसंख्या घट रही है, जबकि केंद्र सरकार मौन है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि झारखंड का गठन आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया था, लेकिन ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई में गंभीर नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि आईबी सप्ताह में 24 घंटे काम करती है, लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठियों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जवाब नहीं दे रही है। बीएसएफ की भी इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के प्रति सकारात्मक रुख नहीं दिखाई दे रहा है। चीफ जस्टिस और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 5 सितंबर को निर्धारित की है।
राज्य सरकार ने इस मामले में जवाब दाखिल कर दिया है, लेकिन केंद्र सरकार ने चार से छह सप्ताह का समय मांगा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार की चार सप्ताह की समय सीमा वाली याचिका को खारिज करते हुए उन्हें दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इससे पहले राज्य सरकार ने छह जिलों के डीसी और एसपी द्वारा जवाब दाखिल किया था।
कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है, इसलिए सभी पक्षकारों को समय पर जवाब देना होगा। पिछली सुनवाई में भारत सरकार के इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के डायरेक्टर जनरल, चीफ इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया, डायरेक्टर जनरल यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया और एनआईए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। कोर्ट ने बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कार्रवाई के संदर्भ में संथाल परगना के छह जिलों के डीसी को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था।
गुरुवार को दानियल दानिश की जनहित याचिका की सुनवाई हुई, जिसमें कहा गया कि जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज जैसे झारखंड के बॉर्डर इलाकों से बांग्लादेशी घुसपैठिए आ रहे हैं, जिससे इन जिलों में जनसंख्या पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इन जिलों में मदरसे बढ़ रहे हैं और स्थानीय आदिवासियों के साथ वैवाहिक संबंध बनाए जा रहे हैं। उन्होंने भारत सरकार के गृह मंत्रालय से रिपोर्ट की मांग की कि कैसे बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड में प्रवेश कर रहे हैं और स्थानीय लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

