कानपुर-सागर नेशनल हाइवे पर हादसों की राेकथाम के लिए आरटीओ ने की बड़ी कार्रवाई
Aug 16, 2024 | by Janjeevan
भारी वाहनों के 107 चालकों के लाइसेंस निलम्बित
हमीरपुर, 16 अगस्त (हि.स.)। कानपुर-सागर नेशनल हाइवे पर लगातार हो रहे हादसों पर अंकुश लगाने के लिए एआरटीओ ने एक नई योजना बनाई है। दुर्घटनाओं में शामिल भारी वाहनों के चालकों पर कड़ी कार्रवाई की गई है, जिसके तहत अब तक 107 चालकों के लाइसेंस निलम्बित कर दिए गए हैं और उनके खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं। एआरटीओ का मानना है कि यह कदम हाइवे पर दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
कानपुर-सागर नेशनल हाइवे अभी तक फोरलेन में नहीं बदला है, जिसके कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। हमीरपुर जिले के सदर कोतवाली से लेकर मौदहा कोतवाली क्षेत्र तक हर दिन किसी न किसी वाहन का हादसा होता है। इस हाइवे पर हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गवांते हैं और कई लोग घायल होते हैं। पिछले एक दशक में कानपुर से महोबा तक हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं और बड़ी संख्या में लोग अपंग भी हुए हैं। हादसों की संख्या को कम करने के लिए एआरटीओ और पुलिस ने कई बार अभियान चलाए हैं, लेकिन दुर्घटनाओं की संख्या में कमी नहीं आई है।
पूर्व सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल ने लोकसभा में कानपुर-सागर नेशनल हाइवे को फोरलेन बनाने की मांग उठाई थी। उन्होंने संसद में कहा था कि इस हाइवे पर हादसों की वजह से हजारों परिवार बर्बाद हो गए हैं। समाजसेवी और हिंदू संगठनों ने भी इस हाइवे को 'खूनी हाइवे' कहकर विरोध किया था, लेकिन अभी तक इसे फोरलेन में नहीं बदला जा सका है।
एआरटीओ अमिताभ राय ने बताया कि कानपुर-सागर नेशनल हाइवे पर हादसों की वजह बनने वाले वाहनों को चिन्हित करने का अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत भारी वाहनों के चालकों के लाइसेंस भी रद्द किए जा रहे हैं।
भारी वाहनों के 107 चालकों को नोटिस जारी कर उनके जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है। एआरटीओ अमिताभ राय के अनुसार, अब तक 107 हैवी वाहनों के चालकों के लाइसेंस निलम्बित किए गए हैं और यदि नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं होता है, तो लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। इनमें से 76 चालक हमीरपुर के हैं, जबकि अन्य चालक कानपुर नगर, सीतापुर, महोबा, बांदा और कानपुर देहात के हैं।
दो सौ बारह दिनों में कानपुर-सागर नेशनल हाइवे पर 126 लोगों की मौत
कानपुर-सागर नेशनल हाइवे पर हर साल सैकड़ों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गवांते हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक हाइवे को फोरलेन बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इस साल के 212 दिनों में 200 से अधिक हादसे हो चुके हैं, जिनमें 126 लोगों की मौत हुई है और 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इस साल अप्रैल में सबसे अधिक हादसे हुए, जिनमें 29 लोगों की जान गई। जुलाई में भी 12 लोग सड़क हादसों का शिकार हुए हैं, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।

