एससी-एसटी एक्ट के झूठे केस में फंसा कर सरकारी धन की बंदरबांट करने वाले गैंग पर चलेगा केस
Aug 07, 2024 | by Janjeevan
- CBI की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीलबंद**
- आठ मामलों की जांच के लिए एसआईटी को निर्देश
प्रयागराज, 07 अगस्त, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्याय की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं, जिसमें कहा गया कि बार और बेंच न्याय के दो महत्वपूर्ण अंग हैं। किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि झूठे मामलों में फंसाकर सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में कोर्ट चुप नहीं रह सकती और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि सच सामने आना चाहिए और दोषी लोगों को पकड़ा जाना चाहिए।
हाईकोर्ट में एक मामले के शीघ्र निपटारे के लिए दाखिल याचिका में खुलासा हुआ है कि प्रयागराज में कुछ वकील, जो वकालत के बजाय अन्य गतिविधियों में लिप्त हैं, एक गैंग चला रहे हैं। यह गैंग महिलाओं की मदद से एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठे आपराधिक मामले दर्ज करवा रहा है और आरोप पत्र दाखिल होने पर सरकार से पीड़िता को मिलने वाली राशि का बंटवारा कर रहा है।
पुलिस की जांच के बाद न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने सीबीआई को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया। कुछ मामलों की जांच के लिए एसआईटी भी गठित की गई। कोर्ट ने अधिवक्ता भूपेंद्र पांडेय के खिलाफ निक्की देवी द्वारा दारागंज थाने में दर्ज मामले में सीबीआई द्वारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद याचिका को निरर्थक करार दिया है।
वहीं, सीबीआई ने विशेष अदालत लखनऊ में याचिका दायर कर निक्की देवी, अधिवक्ता विनोद शंकर त्रिपाठी और सुधाकर मिश्र के खिलाफ धारा 120बी और धारा 211 भारतीय दंड संहिता के तहत मामले की सुनवाई की मांग की है। कोर्ट ने सीबीआई की प्रारंभिक रिपोर्ट को सील कर दिया है और महानिबंधक के समक्ष पेश किया है, साथ ही एसआईटी को आठ मामलों की जांच करने का निर्देश दिया है। आदेश की एक प्रति आईजी एसआईटी लखनऊ को भी भेजी जाएगी।
याचिका पर अधिवक्ता शैलेश मिश्र, सीबीआई के अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश और विपक्षी भूपेंद्र पांडेय ने बहस की। बाद में कई वकीलों ने नए खुलासों के साथ अर्जियां दीं। कुल 51 आपराधिक मामलों का खुलासा किया गया, जिनमें से सबसे अधिक मामले मऊआइमा में दर्ज हैं।
बताया गया कि वकीलों का एक गैंग महिला की मदद से एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठी एफआईआर दर्ज कराता है और आरोप पत्र दाखिल होने के बाद सरकार से पीड़िता को मिलने वाली राशि का बंटवारा करता है। इस गैंग के द्वारा कई लोगों और वकीलों को झूठे मामलों में फंसाया गया है। भूपेंद्र पांडेय को दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाया गया। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने न्याय की रक्षा के लिए सीबीआई को प्रारंभिक जांच सौंपी, जिसने गैंग को उजागर किया है।
सीबीआई ने 46 मामलों की जांच शुरू की, जिसमें पता चला कि कुल 38 मामले ही हैं। इन मामलों में सराय इनायत और अन्य थानों में दर्ज मामले भी शामिल हैं। कोर्ट ने 108 पृष्ठों के निर्णय में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वालों को नहीं बख्शा जाना चाहिए। फिलहाल, एसआईटी आठ मामलों की जांच करेगी और जिन मामलों में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं, उन मामलों के ट्रायल को संबंधित जिला जजों द्वारा पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

